अन्वयः
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यदा अयम् कूर्मः अङ्गानि इव, इन्द्रियार्थेभ्यः इन्द्रियाणि सर्वशः संहरते च, तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता (भवति) ।
Summary
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When one can completely withdraw the senses from their objects, just as a tortoise draws its limbs into its shell, then one's wisdom is firmly established.
सारांश
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जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है, वैसे ही जब कोई मनुष्य अपनी इंद्रियों को विषयों से पूरी तरह हटा लेता है, तब उसकी बुद्धि स्थिर होती है।
पदच्छेदः
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| यदा | यदा | when |
| संहरते | संहरते (सम्√हृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | withdraws |
| च | च | and |
| अयम् | इदम् (१.१) | this one |
| कूर्मः | कूर्म (१.१) | a tortoise |
| अङ्गानि | अङ्ग (२.३) | its limbs |
| इव | इव | like |
| सर्वशः | सर्वशः | completely |
| इन्द्रियाणि | इन्द्रिय (२.३) | the senses |
| इन्द्रियार्थेभ्यः | इन्द्रिय–अर्थ (५.३) | from the sense objects |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| प्रज्ञा | प्रज्ञा (१.१) | wisdom |
| प्रतिष्ठिता | प्रतिष्ठित (प्रति√स्था+क्त, १.१) | is firmly established |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दा | सं | ह | र | ते | चा | यं |
| कू | र्मो | ऽङ्गा | नी | व | स | र्व | शः |
| इ | न्द्रि | या | णी | न्द्रि | या | र्थे | भ्य |
| स्त | स्य | प्र | ज्ञा | प्र | ति | ष्ठि | ता |
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