अन्वयः
AI
यदा श्रुतिविप्रतिपन्ना ते बुद्धिः समाधौ निश्चला अचला च स्थास्यति, तदा त्वम् योगम् अवाप्स्यसि।
Summary
AI
When your intellect, no longer distracted by the conflicting opinions of Vedic texts, stands firm and unmoving in the trance of self-realization, then you will have attained the state of divine consciousness (Yoga).
सारांश
AI
विभिन्न वचनों को सुनने से विचलित हुई तुम्हारी बुद्धि जब परमात्मा में स्थिर और अचल हो जाएगी, तब तुम योग (परमात्मा से वास्तविक मिलन) को प्राप्त कर लोगे।
पदच्छेदः
AI
| श्रुतिविप्रतिपन्ना | श्रुतिविप्रतिपन्न (१.१) | confused by Vedic texts |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| यदा | यदा | when |
| स्थास्यति | स्थास्यति (√स्था कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will stand |
| निश्चला | निश्चल (१.१) | unmoving |
| समाधौ | समाधि (७.१) | in the trance of self-realization |
| अचला | अचल (१.१) | unwavering |
| बुद्धिः | बुद्धि (१.१) | intellect |
| तदा | तदा | then |
| योगम् | योग (२.१) | yoga |
| अवाप्स्यसि | अवाप्स्यसि (अव√आप् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will attain |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रु | ति | वि | प्र | ति | प | न्ना | ते |
| य | दा | स्था | स्य | ति | नि | श्च | ला |
| स | मा | धा | व | च | ला | बु | द्धि |
| स्त | दा | यो | ग | म | वा | प्स्य | सि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.