अन्वयः
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धनञ्जय, बुद्धियोगात् कर्म दूरेण हि अवरम् अस्ति। त्वम् बुद्धौ शरणम् अन्विच्छ। फलहेतवः कृपणाः हि।
Summary
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O Dhananjaya, keep all fruitive activities far away through this yoga of intellect (Buddhi Yoga) and seek refuge in this consciousness. Those who desire the fruits of their work are misers.
सारांश
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हे धनंजय! बुद्धि योग की तुलना में सकाम कर्म अत्यंत तुच्छ है, इसलिए तुम समत्व बुद्धि की ही शरण लो; फल की इच्छा रखने वाले लोग अत्यंत दीन होते हैं।
पदच्छेदः
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| दूरेण | दूर (३.१) | by far |
| हि | हि | indeed |
| अवरम् | अवर (१.१) | inferior |
| कर्म | कर्मन् (१.१) | action |
| बुद्धियोगात् | बुद्धियोग (५.१) | than Buddhi Yoga |
| धनञ्जय | धनञ्जय (८.१) | O Dhananjaya |
| बुद्धौ | बुद्धि (७.१) | in consciousness |
| शरणम् | शरण (२.१) | refuge |
| अन्विच्छ | अन्विच्छ (अनु√इष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | seek |
| कृपणाः | कृपण (१.३) | misers |
| फलहेतवः | फलहेतु (१.३) | those who desire fruitive results |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दू | रे | ण | ह्य | व | रं | क | र्म |
| बु | द्धि | यो | गा | द्ध | नं | ज | य |
| बु | द्धौ | श | र | ण | म | न्वि | च्छ |
| कृ | प | णाः | फ | ल | हे | त | वः |
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