अन्वयः
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कुरुनन्दन, इह व्यवसायात्मिका बुद्धिः एका एव अस्ति। हि अव्यवसायिनाम् बुद्धयः बहुशाखाः अनन्ताः च भवन्ति।
Summary
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O joy of the Kurus, on this path, the intellect is resolute and one-pointed. In contrast, the intellects of the irresolute are many-branched and endless.
सारांश
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हे अर्जुन, इस निष्काम कर्मयोग में निश्चयात्मक बुद्धि एक ही है, किंतु अस्थिर विचार वाले अज्ञानी पुरुषों की बुद्धियाँ अनंत और बहुत शाखाओं वाली होती हैं।
पदच्छेदः
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| व्यवसायात्मिका | व्यवसायात्मिक (१.१) | resolute |
| बुद्धिः | बुद्धि (१.१) | intellect |
| एका | एक (१.१) | one-pointed |
| इह | इह | in this path |
| कुरुनन्दन | कुरुनन्दन (८.१) | O joy of the Kurus |
| बहुशाखाः | बहुशाख (१.३) | many-branched |
| हि | हि | indeed |
| अनन्ताः | अनन्त (१.३) | endless |
| च | च | and |
| बुद्धयः | बुद्धि (१.३) | intellects |
| अव्यवसायिनाम् | अव्यवसायिन् (६.३) | of the irresolute |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्य | व | सा | या | त्मि | का | बु | द्धि |
| रे | के | ह | कु | रु | न | न्द | न |
| ब | हु | शा | खा | ह्य | न | न्ता | श्च |
| बु | द्ध | यो | ऽव्य | व | सा | यि | नाम् |
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