अन्वयः
AI
अथ चेत् त्वम् इमम् धर्म्यम् संग्रामम् न करिष्यसि, ततः स्वधर्मम् कीर्तिम् च हित्वा पापम् अवाप्स्यसि।
Summary
AI
However, if you do not fight this righteous battle, then you will fail in your duty and lose your reputation, thereby incurring sin.
सारांश
AI
यदि तुम इस धर्मयुक्त युद्ध को नहीं करोगे, तो अपने स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप के भागी बनोगे।
पदच्छेदः
AI
| अथ | अथ | now if |
| चेत् | चेत् | if |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| इमम् | इदम् (२.१) | this |
| धर्म्यम् | धर्म्य (२.१) | righteous |
| संग्रामम् | संग्राम (२.१) | battle |
| न | न | not |
| करिष्यसि | करिष्यसि (√कृ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will do |
| ततः | ततः | then |
| स्वधर्मम् | स्वधर्म (२.१) | your duty |
| कीर्तिम् | कीर्ति (२.१) | fame |
| च | च | and |
| हित्वा | हित्वा (√हा+क्त्वा) | having abandoned |
| पापम् | पाप (२.१) | sin |
| अवाप्स्यसि | अवाप्स्यसि (अव√आप् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will incur |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | चे | त्त्व | मि | मं | ध | र्म्यं |
| सं | ग्रा | मं | न | क | रि | ष्य | सि |
| त | तः | स्व | ध | र्मं | की | र्तिं | च |
| हि | त्वा | पा | प | म | वा | प्स्य | सि |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.