अन्वयः
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अयम् अव्यक्तः, अयम् अचिन्त्यः, अयम् अविकार्यः उच्यते। तस्मात् एनम् एवम् विदित्वा अनुशोचितुम् न अर्हसि।
Summary
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It is said that the soul is invisible, inconceivable, and immutable. Knowing this, you should not grieve for the body.
सारांश
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यह आत्मा अव्यक्त, अचिन्त्य और विकाररहित कही जाती है। अतः इसे ऐसा जानकर तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
पदच्छेदः
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| अव्यक्तः | अव्यक्त (वि√अञ्ज्+नञ्+क्त, १.१) | unmanifest |
| अयम् | इदम् (१.१) | this (soul) |
| अचिन्त्यः | अचिन्त्य (√चिन्त्+नञ्+ण्यत्, १.१) | inconceivable |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अविकार्यः | अविकार्य (वि√कृ+नञ्+ण्यत्, १.१) | unchangeable |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is said to be |
| तस्मात् | तस्मात् | therefore |
| एवम् | एवम् | thus |
| विदित्वा | विदित्वा (√विद्+क्त्वा) | having known |
| एनम् | इदम् (२.१) | this |
| न | न | not |
| अनुशोचितुम् | अनुशोचितुम् (अनु√शुच्+तुमुन्) | to grieve |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you should |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | व्य | क्तो | ऽय | म | चि | न्त्यो | ऽय |
| म | वि | का | र्यो | ऽय | मु | च्य | ते |
| त | स्मा | दे | वं | वि | दि | त्वै | नं |
| ना | नु | शो | चि | तु | म | र्ह | सि |
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