अन्वयः
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शस्त्राणि एनम् न छिन्दन्ति, पावकः एनम् न दहति, आपः च एनम् न क्लेदयन्ति, मारुतः न शोषयति।
Summary
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The soul can never be cut to pieces by any weapon, nor burned by fire, nor moistened by water, nor withered by the wind.
सारांश
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इस आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग जला सकती है, न जल गीला कर सकता है और न ही वायु सुखा सकती है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| एनम् | इदम् (२.१) | it |
| छिन्दन्ति | छिन्दन्ति (√छिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cut |
| शस्त्राणि | शस्त्र (१.३) | weapons |
| न | न | not |
| एनम् | इदम् (२.१) | it |
| दहति | दहति (√दह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | burns |
| पावकः | पावक (१.१) | fire |
| न | न | not |
| च | च | and |
| एनम् | इदम् (२.१) | it |
| क्लेदयन्ति | क्लेदयन्ति (√क्लिद् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | moisten |
| आपः | अप् (१.३) | waters |
| न | न | not |
| शोषयति | शोषयति (√शुष् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | dries |
| मारुतः | मारुत (१.१) | wind |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नै | नं | छि | न्द | न्ति | श | स्त्रा | णि |
| नै | नं | द | ह | ति | पा | व | कः |
| न | चै | नं | क्ले | द | य | न्त्या | पो |
| न | शो | ष | य | ति | मा | रु | तः |
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