तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः ।
विस्मयो मे महान्राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः ॥

अन्वयः AI राजन्, हरेः तत् अतिअद्भुतम् रूपम् च संस्मृत्य संस्मृत्य मे महान् विस्मयः (भवति), (अहम्) पुनः पुनः हृष्यामि च।
Summary AI O King, as I remember and remember that most wonderful form of Hari, my amazement is great, and I rejoice again and again.
सारांश AI हे राजन! श्रीहरि के उस अत्यंत अलौकिक रूप का बार-बार स्मरण कर मुझे महान विस्मय हो रहा है और मैं पुनः-पुनः आनंदित हो रहा हूँ।
पदच्छेदः AI
तत्तद् (२.१) That
and
संस्मृत्यसंस्मृत्य (सम्√स्मृ+ल्यप्) remembering
संस्मृत्यसंस्मृत्य (सम्√स्मृ+ल्यप्) and remembering
रूपम्रूप (२.१) form
अतिअद्भुतम्अतिअद्भुत (२.१) most wonderful
हरेःहरि (६.१) of Hari (Krishna)
विस्मयःविस्मय (१.१) amazement
मेअस्मद् (६.१) my
महान्महत् (१.१) is great
राजन्राजन् (८.१) O King
हृष्यामिहृष्यामि (√हृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) I rejoice
and
पुनःपुनर् again
पुनःपुनर् and again
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
च्च सं स्मृ त्य सं स्मृ त्य
रू त्य द्भु तं रेः
वि स्म यो मे हा न्रा
न्हृ ष्या मि पु नः पु नः
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