अन्वयः
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मच्चित्तः (सन्) मत्प्रसादात् सर्वदुर्गाणि तरिष्यसि। अथ चेत् त्वम् अहंकारात् न श्रोष्यसि, (तर्हि) विनङ्क्ष्यसि।
Summary
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With your mind fixed on Me, you will overcome all obstacles by My grace. But if, due to egoism, you do not listen, you will perish.
सारांश
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मुझमें चित्त लगाकर तुम मेरी कृपा से सभी बाधाओं को पार कर जाओगे; किंतु यदि अहंकारवश मेरी बात नहीं सुनोगे तो नष्ट हो जाओगे।
पदच्छेदः
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| मच्चित्तः | अस्मद्–चित्त (१.१) | With mind fixed on Me |
| सर्वदुर्गाणि | सर्व–दुर्ग (२.३) | all obstacles |
| मत्प्रसादात् | अस्मद्–प्रसाद (५.१) | by My grace |
| तरिष्यसि | तरिष्यसि (√तॄ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will overcome |
| अथ | अथ | But if |
| चेत् | चेत् | if |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| अहंकारात् | अहंकार (५.१) | due to egoism |
| न | न | not |
| श्रोष्यसि | श्रोष्यसि (√श्रु कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will listen |
| विनङ्क्ष्यसि | विनङ्क्ष्यसि (वि√नश् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will perish |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | च्चि | त्तः | स | र्व | दु | र्गा | णि |
| म | त्प्र | सा | दा | त्त | रि | ष्य | सि |
| अ | थ | चे | त्त्व | म | हं | का | रा |
| न्न | श्रो | ष्य | सि | वि | न | ङ्क्ष्य | सि |
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