अन्वयः
AI
यतः भूतानाम् प्रवृत्तिः (भवति), येन इदम् सर्वम् ततम्, तम् स्वकर्मणा अभ्यर्च्य मानवः सिद्धिम् विन्दति ।
Summary
AI
By worshipping Him—from whom all beings originate and by whom all this is pervaded—through the performance of one's own duty, a person attains perfection.
सारांश
AI
जिस परमेश्वर से समस्त प्राणियों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह जगत व्याप्त है, उसकी अपने कर्मों द्वारा अर्चना कर मनुष्य सिद्धि प्राप्त करता है।
पदच्छेदः
AI
| यतः | यतः | From whom |
| प्रवृत्तिः | प्रवृत्ति (१.१) | is the emanation |
| भूतानाम् | भूत (६.३) | of all beings |
| येन | यद् (३.१) | by whom |
| सर्वम् | सर्व (१.१) | all |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| ततम् | तत (√तन्+क्त, १.१) | is pervaded |
| स्वकर्मणा | स्व–कर्मन् (३.१) | by his own duty |
| तम् | तद् (२.१) | Him |
| अभ्यर्च्य | अभ्यर्च्य (अभि√अर्च्+ल्यप्) | by worshipping |
| सिद्धिम् | सिद्धि (२.१) | perfection |
| विन्दति | विन्दति (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| मानवः | मानव (१.१) | a person |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | तः | प्र | वृ | त्ति | र्भू | ता | नां |
| ये | न | स | र्व | मि | दं | त | तम् |
| स्व | क | र्म | णा | त | म | भ्य | र्च्य |
| सि | द्धिं | वि | न्द | ति | मा | न | वः |
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.