अन्वयः
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यत् कर्म नियतम्, सङ्गरहितम्, अरागद्वेषतः, अफलप्रेप्सुना कृतम्, तत् सात्त्विकम् उच्यते ।
Summary
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An action which is obligatory, performed without attachment, without love or hatred, by one who does not desire the fruit, is called sattvic.
सारांश
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जो कर्म शास्त्रविधि से नियत, आसक्ति रहित और बिना राग-द्वेष के फल न चाहने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाता है, वह सात्त्विक कहलाता है।
पदच्छेदः
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| नियतम् | नियत (नि√यम्+क्त, १.१) | prescribed |
| सङ्गरहितम् | सङ्ग–रहित (१.१) | free from attachment |
| अरागद्वेषतः | अरागद्वेषतस् | without attraction or aversion |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | performed |
| अफलप्रेप्सुना | अ–फल–प्रेप्सु (३.१) | by one not desiring the fruit |
| कर्म | कर्मन् (१.१) | action |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| सात्त्विकम् | सात्त्विक (१.१) | sattvic |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | य | तं | स | ङ्ग | र | हि | त |
| म | रा | ग | द्वे | ष | तः | कृ | तम् |
| अ | फ | ल | प्रे | प्सु | ना | क | र्म |
| य | त्त | त्सा | त्त्वि | क | मु | च्य | ते |
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