अन्वयः
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येन (ज्ञानेन) विभक्तेषु सर्वभूतेषु एकम् अव्ययम् अविभक्तम् भावम् ईक्षते, तत् ज्ञानम् सात्त्विकम् विद्धि ।
Summary
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Know that knowledge to be sattvic by which one sees one imperishable, undivided existence in all separate beings.
सारांश
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जिस ज्ञान से विभक्त प्राणियों में एक ही अविनाशी और अभेद भाव देखा जाता है, उस ज्ञान को सात्त्विक समझो।
पदच्छेदः
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| सर्वभूतेषु | सर्व–भूत (७.३) | in all beings |
| येन | यद् (३.१) | By which |
| एकम् | एक (२.१) | one |
| भावम् | भाव (२.१) | existence |
| अव्ययम् | अव्यय (२.१) | imperishable |
| ईक्षते | ईक्षते (√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | one sees |
| अविभक्तम् | अविभक्त (वि√भज्+क्त, २.१) | undivided |
| विभक्तेषु | विभक्त (वि√भज्+क्त, ७.३) | in the divided |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| ज्ञानम् | ज्ञान (२.१) | knowledge |
| विद्धि | विद्धि (√विद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | know |
| सात्त्विकम् | सात्त्विक (२.१) | to be sattvic |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्व | भू | ते | षु | ये | नै | कं |
| भा | व | म | व्य | य | मी | क्ष | ते |
| अ | वि | भ | क्तं | वि | भ | क्ते | षु |
| त | ज्ज्ञा | नं | वि | द्धि | सा | त्त्वि | कम् |
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