अन्वयः
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नरः शरीरवाङ्मनोभिः यत् न्याय्यम् वा विपरीतम् वा कर्म प्रारभते, तस्य एते पञ्च हेतवः (सन्ति) ।
Summary
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Whatever action a person undertakes with their body, speech, or mind, whether it is right or wrong, these five are its causes.
सारांश
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मनुष्य मन, वाणी और शरीर से जो भी उचित या अनुचित कर्म आरंभ करता है, उसके ये पांचों ही कारण होते हैं।
पदच्छेदः
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| शरीरवाङ्मनोभिः | शरीर–वाच्–मनस् (३.३) | with body, speech, and mind |
| यत् | यद् (२.१) | whatever |
| कर्म | कर्मन् (२.१) | action |
| प्रारभते | प्रारभते (प्र+आ√रभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | undertakes |
| नरः | नर (१.१) | a person |
| न्याय्यम् | न्याय्य (२.१) | right |
| वा | वा | or |
| विपरीतम् | विपरीत (२.१) | wrong |
| वा | वा | or |
| पञ्च | पञ्चन् (१.३) | five |
| एते | एतद् (१.३) | these |
| तस्य | तद् (६.१) | are its |
| हेतवः | हेतु (१.३) | causes |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | री | र | वा | ङ्म | नो | भि | र्य |
| त्क | र्म | प्रा | र | भ | ते | न | रः |
| न्या | य्यं | वा | वि | प | री | तं | वा |
| प | ञ्चै | ते | त | स्य | हे | त | वः |
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