अन्वयः
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भारत! महत् ब्रह्म मम योनिः (अस्ति) । तस्मिन् अहम् गर्भम् दधामि । ततः सर्वभूतानाम् संभवः भवति ।
Summary
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Krishna tells Arjuna (O Bharata) that the great Brahman (Prakriti, or primordial matter) is His womb. In it, He places the seed, and from that, the birth of all beings occurs.
सारांश
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हे भारत! मेरी महद्ब्रह्म रूप प्रकृति समस्त भूतों की योनि है और मैं उसमें बीज स्थापित करता हूँ, जिससे सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है।
पदच्छेदः
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| मम | अस्मद् (६.१) | My |
| योनिः | योनि (१.१) | womb |
| महत् | महत् (१.१) | great |
| ब्रह्म | ब्रह्मन् (१.१) | Brahman (Prakriti) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that |
| गर्भम् | गर्भ (२.१) | the seed |
| दधामि | दधामि (√धा कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I place |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| संभवः | संभव (सम्√भू+अप्, १.१) | The birth |
| सर्वभूतानाम् | सर्व–भूत (६.३) | of all beings |
| ततः | ततः | from that |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arises |
| भारत | भारत (८.१) | O Bharata |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | म | यो | नि | र्म | ह | द्ब्र | ह्म |
| त | स्मि | न्ग | र्भं | द | धा | म्य | हम् |
| सं | भ | वः | स | र्व | भू | ता | नां |
| त | तो | भ | व | ति | भा | र | त |
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