यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः ।
क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥

अन्वयः AI भारत, यथा एकः रविः इमम् कृत्स्नम् लोकम् प्रकाशयति, तथा क्षेत्री कृत्स्नम् क्षेत्रम् प्रकाशयति ।
Summary AI O descendant of Bharata, just as the one sun illuminates this entire world, so does the knower of the field (the Self) illuminate the entire field (the body).
सारांश AI हे अर्जुन! जिस प्रकार अकेला सूर्य इस संपूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार क्षेत्रज्ञ (परमात्मा) संपूर्ण क्षेत्र को आलोकित करता है।
पदच्छेदः AI
यथायथा As
प्रकाशयतिप्रकाशयति (प्र√काश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) illuminates
एकःएक (१.१) the one
कृत्स्नम्कृत्स्न (२.१) entire
लोकम्लोक (२.१) world
इमम्इदम् (२.१) this
रविःरवि (१.१) sun
क्षेत्रम्क्षेत्र (२.१) the field
क्षेत्रीक्षेत्रिन् (१.१) the knower of the field
तथातथा so
कृत्स्नम्कृत्स्न (२.१) the entire
प्रकाशयतिप्रकाशयति (प्र√काश् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) illuminates
भारतभारत (८.१) O Bharata
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
था प्र का त्ये कः
कृ त्स्नं लो मि मं विः
क्षे त्रं क्षे त्री था कृ त्स्नं
प्र का ति भा
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