अन्वयः
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यः एवम् पुरुषम् प्रकृतिम् च गुणैः सह वेत्ति, सः सर्वथा वर्तमानः अपि भूयः न अभिजायते ।
Summary
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One who thus knows the Purusha and Prakriti along with its gunas, is not born again, regardless of their present mode of life.
सारांश
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जो मनुष्य पुरुष, प्रकृति और उसके गुणों के रहस्य को जान लेता है, वह वर्तमान में किसी भी प्रकार से कर्म करते हुए भी पुनः जन्म नहीं लेता।
पदच्छेदः
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| यः | यद् (१.१) | He who |
| एवम् | एवम् | thus |
| वेत्ति | वेत्ति (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | knows |
| पुरुषम् | पुरुष (२.१) | the Purusha |
| प्रकृतिम् | प्रकृति (२.१) | and Prakriti |
| च | च | and |
| गुणैः | गुण (३.३) | with the gunas |
| सह | सह | along with |
| सर्वथा | सर्वथा | in whatever way |
| वर्तमानः | वर्तमान (√वृत्+शानच्, १.१) | he may be living |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भूयः | भूयस् | again |
| अभिजायते | अभिजायते (अभि√जन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is born |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | ए | वं | वे | त्ति | पु | रु | षं |
| प्र | कृ | तिं | च | गु | णैः | स | ह |
| स | र्व | था | व | र्त | मा | नो | ऽपि |
| न | स | भू | यो | ऽभि | जा | य | ते |
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