अन्वयः
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मयि एव मनः आधत्स्व, मयि बुद्धिम् निवेशय। अतः ऊर्ध्वम् मयि एव निवसिष्यसि, न संशयः।
Summary
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Krishna instructs Arjuna to fix his mind on Him alone and absorb his intellect in Him. By doing so, Arjuna will undoubtedly reside in Him hereafter. There is no doubt about this.
सारांश
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तुम अपना मन और बुद्धि मुझमें ही स्थिर करो, इसके बाद तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।
पदच्छेदः
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| मयि | अस्मद् (७.१) | on Me |
| एव | एव | alone |
| मनः | मनस् (२.१) | your mind |
| आधत्स्व | आधत्स्व (आ√धा कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | fix |
| मयि | अस्मद् (७.१) | in Me |
| बुद्धिम् | बुद्धि (२.१) | your intellect |
| निवेशय | निवेशय (नि√विश् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | absorb |
| निवसिष्यसि | निवसिष्यसि (नि√वस् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will reside |
| मयि | अस्मद् (७.१) | in Me |
| एव | एव | alone |
| अतः | अतः | hereafter |
| ऊर्ध्वम् | ऊर्ध्वम् | henceforth |
| न | न | no |
| संशयः | संशय (१.१) | doubt |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | य्ये | व | म | न | आ | ध | त्स्व |
| म | यि | बु | द्धिं | नि | वे | श | य |
| नि | व | सि | ष्य | सि | म | य्ये | व |
| अ | त | ऊ | र्ध्वं | न | सं | श | यः |
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