मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते ।
श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः ॥

अन्वयः AI (श्रीभगवानुवाच) ये मयि मनः आवेश्य, नित्य-युक्ताः (सन्तः) परया श्रद्धया उपेताः (भूत्वा) माम् उपासते, ते मे युक्त-तमाः मताः ।
Summary AI The Blessed Lord said: "Those who fix their minds on Me and, ever steadfast, worship Me with supreme faith, them I consider to be the most perfect in yoga."
सारांश AI श्री कृष्ण ने कहा- जो मुझमें मन लगाकर, परम श्रद्धा के साथ निरंतर मेरी उपासना करते हैं, वे ही मेरे मत में सर्वश्रेष्ठ योगी हैं।
पदच्छेदः AI
मयिअस्मद् (७.१) On Me
आवेश्यआवेश्य (आ√विश्+ल्यप्) fixing
मनःमनस् (२.१) the mind
येयद् (१.३) those who
माम्अस्मद् (२.१) Me
नित्ययुक्ताःनित्ययुक्त (१.३) ever steadfast
उपासतेउपासते (उद्√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) worship
श्रद्धयाश्रद्धा (३.१) with faith
परयापरा (३.१) supreme
उपेताःउपेता (उप√इ+क्त, १.३) endowed
तेतद् (१.३) they
मेअस्मद् (३.१) by Me
युक्ततमाःयुक्ततम (१.३) the most perfect in yoga
मताःमत (√मन्+क्त, १.३) are considered
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
य्या वे श्य नो ये मां
नि त्य यु क्ता पा ते
श्र द्ध या यो पे ता
स्ते मे यु क्त मा ताः
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