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अभ्यासेऽप्यसमर्थोऽसि मत्कर्मपरमो भव ।
मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥

अन्वयः AI (त्वम्) अभ्यासे अपि असमर्थः असि (चेत्), मत्-कर्म-परमः भव। मदर्थम् अपि कर्माणि कुर्वन् सिद्धिम् अवाप्स्यसि।
Summary AI If you are unable even to practice, then be devoted to performing actions for My sake. By performing actions for Me as the supreme goal, you will attain perfection.
सारांश AI यदि तुम अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो केवल मेरे लिए कर्म करने के परायण हो जाओ; मेरे निमित्त कर्म करते हुए भी तुम सिद्धि पाओगे।
पदच्छेदः AI
अभ्यासेअभ्यास (७.१) in practice
अपिअपि even
असमर्थःअसमर्थ (१.१) unable
असिअसि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) you are
मत्कर्मपरमःमत्कर्मपरम (१.१) one for whom My work is the supreme goal
भवभव (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) be
मदर्थम्मत्अर्थम् for My sake
अपिअपि even
कर्माणिकर्मन् (२.३) actions
कुर्वन्कुर्वत् (√कृ+शतृ, १.१) by performing
सिद्धिम्सिद्धि (२.१) perfection
अवाप्स्यसिअवाप्स्यसि (अव√आप् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) you will attain
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
भ्या से ऽप्य र्थो ऽसि
त्क र्म मो
र्थ पि र्मा णि
कु र्व न्सि द्धि वा प्स्य सि
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