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नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते
नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व ।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं
सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः ॥

अन्वयः AI सर्व, ते पुरस्तात् नमः, अथ पृष्ठतः (अपि) नमः । ते सर्वतः एव नमः अस्तु । अनन्तवीर्य-अमितविक्रमः त्वम् सर्वम् समाप्नोषि, ततः सर्वः असि ।
Summary AI "O All, salutations to You from the front and from behind. Salutations to You from all sides indeed. O You of infinite prowess and immeasurable might, You encompass everything, and therefore, You are everything."
सारांश AI हे सर्वस्वरूप! आपको आगे से, पीछे से और सब ओर से नमस्कार हो। हे अनन्त वीर्य और अमित पराक्रम वाले! आप समस्त जगत को व्याप्त किए हुए हैं, इसलिए आप ही सब कुछ हैं।
पदच्छेदः AI
नमःनमस् Salutations
पुरस्तात्पुरस्तात् from the front
अथअथ and
पृष्ठतःपृष्ठतस् from behind
तेयुष्मद् (४.१) to You
नमःनमस् salutations
अस्तुअस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) let there be
तेयुष्मद् (४.१) to You
सर्वतःसर्वतस् from all sides
एवएव indeed
सर्वसर्व (८.१) O All
अनन्तवीर्यअनन्तवीर्य of infinite prowess
अमितविक्रमःअमितविक्रम (१.१) of immeasurable might
त्वम्युष्मद् (१.१) You
सर्वम्सर्व (२.१) everything
समाप्नोषिसमाप्नोषि (सम्√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) encompass
ततःततस् therefore
असिअसि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) You are
सर्वःसर्व (१.१) All
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
मः पु स्ता पृ ष्ठ स्ते
मो ऽस्तु ते र्व र्व
न्त वी र्या मि वि क्र स्त्वं
र्वं मा प्नो षि तो ऽसि र्वः
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