मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥

अन्वयः AI प्रभो योगेश्वर, यदि तत् मया द्रष्टुम् शक्यम् इति मन्यसे, ततः त्वम् मे अव्ययम् आत्मानम् दर्शय ।
Summary AI O Lord, O Master of Yoga, if you think it is possible for me to see it, then please show me your imperishable Self.
सारांश AI हे प्रभु! यदि आप मानते हैं कि मैं आपके उस रूप को देखने में समर्थ हूँ, तो हे योगेश्वर! आप मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप के दर्शन कराइए।
पदच्छेदः AI
मन्यसेमन्यसे (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) You think
यदियदि if
तत्तद् (१.१) that
शक्यम्शक्य (१.१) is possible
मयाअस्मद् (३.१) by me
द्रष्टुम्द्रष्टुम् (√दृश्+तुमुन्) to see
इतिइति thus
प्रभोप्रभु (८.१) O Lord
योगेश्वरयोगईश्वर (८.१) O Lord of Yoga
ततःततः then
मेअस्मद् (४.१) to me
त्वम्युष्मद् (१.१) You
दर्शयदर्शय (दृश्√दृश् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) show
आत्मानम्आत्मन् (२.१) Yourself
अव्ययम्अव्यय (२.१) imperishable
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
न्य से दि च्छ क्यं
या द्र ष्टु मि ति प्र भो
यो गे श्व तो मे त्वं
र्श या त्मा व्य यम्
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