दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि
दृष्ट्वैव कालानलसंनिभानि ।
दिशो न जाने न लभे च शर्म
प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥
दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि
दृष्ट्वैव कालानलसंनिभानि ।
दिशो न जाने न लभे च शर्म
प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥
दृष्ट्वैव कालानलसंनिभानि ।
दिशो न जाने न लभे च शर्म
प्रसीद देवेश जगन्निवास ॥
अन्वयः
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देवेश जगन्निवास, ते दंष्ट्राकरालानि कालानलसंनिभानि मुखानि दृष्ट्वा एव दिशः न जाने, शर्म च न लभे । प्रसीद ।
Summary
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O Lord of gods, O refuge of the universe, just seeing Your faces, fearsome with tusks and resembling the fire of cosmic dissolution, I lose my sense of direction and find no refuge. Be gracious!
सारांश
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प्रलयकाल की अग्नि के समान भयानक दाढ़ों वाले आपके मुखों को देखकर मैं दिशाओं को नहीं जान पा रहा हूँ और न मुझे सुख मिल रहा है। हे देवेश! हे जगन्निवास! आप प्रसन्न हों।
पदच्छेदः
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| दंष्ट्राकरालानि | दंष्ट्रा–कराल (२.३) | fearsome with tusks |
| च | च | and |
| ते | युष्मद् (६.१) | Your |
| मुखानि | मुख (२.३) | faces |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश्+क्त्वा) | having seen |
| एव | एव | just |
| कालानलसंनिभानि | काल–अनल–संनिभ (२.३) | resembling the fire of dissolution |
| दिशः | दिश् (२.३) | the directions |
| न | न | not |
| जाने | जाने (√ज्ञा कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I know |
| न | न | not |
| लभे | लभे (√लभ् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I find |
| च | च | and |
| शर्म | शर्मन् (२.१) | refuge |
| प्रसीद | प्रसीद (प्र√सद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | be gracious |
| देवेश | देव–ईश (८.१) | O Lord of gods |
| जगन्निवास | जगत्–निवास (८.१) | O refuge of the universe |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दं | ष्ट्रा | क | रा | ला | नि | च | ते | मु | खा | नि |
| दृ | ष्ट्वै | व | का | ला | न | ल | सं | नि | भा | नि |
| दि | शो | न | जा | ने | न | ल | भे | च | श | र्म |
| प्र | सी | द | दे | वे | श | ज | ग | न्नि | वा | स |
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