अन्वयः
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(तत् रूपम्) दिव्य माल्य अम्बर धरम्, दिव्य गन्ध अनुलेपनम्, सर्व आश्चर्य मयम्, अनन्तम्, विश्वतोमुखम् देवम् (पार्थः अपश्यत्) ।
Summary
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Wearing divine garlands and garments, anointed with divine fragrances, all-wonderful, resplendent, endless, and facing in every direction.
सारांश
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वे दिव्य मालाओं और वस्त्रों से सुसज्जित थे, दिव्य गंधों से अनुलिप्त थे और सब ओर मुख वाले, अनंत एवं समस्त आश्चर्यों से युक्त प्रकाशमान देव थे।
पदच्छेदः
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| दिव्यमाल्याम्बरधरम् | दिव्य–माल्य–अम्बर–धर (२.१) | wearing divine garlands and garments |
| दिव्यगन्धानुलेपनम् | दिव्य–गन्ध–अनुलेपन (२.१) | anointed with divine fragrances |
| सर्वाश्चर्यमयम् | सर्व–आश्चर्य–मय (२.१) | all-wondrous |
| देवम् | देव (२.१) | the God |
| अनन्तम् | अनन्त (२.१) | endless |
| विश्वतोमुखम् | विश्वतस्–मुख (२.१) | facing all directions |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | व्य | मा | ल्या | म्ब | र | ध | रं |
| दि | व्य | ग | न्धा | नु | ले | प | नम् |
| स | र्वा | श्च | र्य | म | यं | दे | व |
| म | न | न्तं | वि | श्व | तो | मु | खम् |
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