प्रतममलघुमौक्तकाभमासी-
च्छ्रमजलमुज्ज्वलगण्डमण्डलेषु ।
कठिनकुचतटाग्रपाति पश्चा-
दथ शतसर्करतां जगाम तासाम् ॥
प्रतममलघुमौक्तकाभमासी-
च्छ्रमजलमुज्ज्वलगण्डमण्डलेषु ।
कठिनकुचतटाग्रपाति पश्चा-
दथ शतसर्करतां जगाम तासाम् ॥
च्छ्रमजलमुज्ज्वलगण्डमण्डलेषु ।
कठिनकुचतटाग्रपाति पश्चा-
दथ शतसर्करतां जगाम तासाम् ॥
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त | म | म | ल | घु | मौ | क्त | का | भ | मा | सी | |
| च्छ्र | म | ज | ल | मु | ज्ज्व | ल | ग | ण्ड | म | ण्ड | ले | षु |
| क | ठि | न | कु | च | त | टा | ग्र | पा | ति | प | श्चा | |
| द | थ | श | त | स | र्क | र | तां | ज | गा | म | ता | साम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.