त्यजति कष्टामसावचिरादसू-
न्विरहवेदनयेत्यघशङ्गिभिः ।
प्रियतया गदितास्त्वयि बान्धवै-
रवितथा वितथाः सखि मा गिरः ॥
त्यजति कष्टामसावचिरादसू-
न्विरहवेदनयेत्यघशङ्गिभिः ।
प्रियतया गदितास्त्वयि बान्धवै-
रवितथा वितथाः सखि मा गिरः ॥
न्विरहवेदनयेत्यघशङ्गिभिः ।
प्रियतया गदितास्त्वयि बान्धवै-
रवितथा वितथाः सखि मा गिरः ॥
छन्दः
द्रुतविलम्बितम् [१२: नभभर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्य | ज | ति | क | ष्टा | म | सा | व | चि | रा | द | सू |
| न्वि | र | ह | वे | द | न | ये | त्य | घ | श | ङ्गि | भिः |
| प्रि | य | त | या | ग | दि | ता | स्त्व | यि | बा | न्ध | वै |
| र | वि | त | था | वि | त | थाः | स | खि | मा | गि | रः |
| न | भ | भ | र | ||||||||
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