क्रान्तं रुचा श्यामलिताभिरामं-
लताभिरामन्त्रितषट्पदाभिः ।
श्रितं शिलाश्यामलताभिरामं
लताभिरामनत्रितषट्पदाभिः ॥
क्रान्तं रुचा श्यामलिताभिरामं-
लताभिरामन्त्रितषट्पदाभिः ।
श्रितं शिलाश्यामलताभिरामं
लताभिरामनत्रितषट्पदाभिः ॥
लताभिरामन्त्रितषट्पदाभिः ।
श्रितं शिलाश्यामलताभिरामं
लताभिरामनत्रितषट्पदाभिः ॥
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्रा | न्तं | रु | चा | श्या | म | लि | ता | भि | रा | मं | |
| ल | ता | भि | रा | म | न्त्रि | त | ष | ट्प | दा | भिः | |
| श्रि | तं | शि | ला | श्या | म | ल | ता | भि | रा | मं | |
| ल | ता | भि | रा | म | न | त्रि | त | ष | ट्प | दा | भिः |
| ज | त | ज | ग | ग | |||||||
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