Loading data... On slow networks this could take a few minutes.
100%

आच्छादितायतददिगम्बरमुच्चकैर्गा-
माक्रम्यसंस्थितमुदग्रविशालशृङ्गम् ।
मूर्ध्निस्खलत्तुहिनदीधितिकोटिमेन-
मुद्वीक्ष्य को भुवि न विस्मयते नगेशम् ॥

छन्दः वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५
च्छा दि ता दि म्ब मु च्च कै र्गा
मा क्र म्य सं स्थि मु ग्र वि शा शृ ङ्गम्
मू र्ध्नि स्ख त्तु हि दी धि ति को टि मे
मु द्वी क्ष्य को भु वि वि स्म ते गे शम्
About

Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.