उद्धृत्यमेघैस्तत एव तोय-
मर्थं मुनीन्द्रैरिव संप्रणीताः ।
आलोकयामास हरिः पतन्ती-
र्नदीः स्मृतिर्वदमिवाम्बुराशिम् ॥
उद्धृत्यमेघैस्तत एव तोय-
मर्थं मुनीन्द्रैरिव संप्रणीताः ।
आलोकयामास हरिः पतन्ती-
र्नदीः स्मृतिर्वदमिवाम्बुराशिम् ॥
मर्थं मुनीन्द्रैरिव संप्रणीताः ।
आलोकयामास हरिः पतन्ती-
र्नदीः स्मृतिर्वदमिवाम्बुराशिम् ॥
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | द्धृ | त्य | मे | घै | स्त | त | ए | व | तो | य |
| म | र्थं | मु | नी | न्द्रै | रि | व | सं | प्र | णी | ताः |
| आ | लो | क | या | मा | स | ह | रिः | प | त | न्ती |
| र्न | दीः | स्मृ | ति | र्व | द | मि | वा | म्बु | रा | शिम् |
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.