स्नग्धाञ्जनस्यमरुचिः सुवृत्तः
बद्वा इवाद्वंसितवर्णकान्तेः ।
विशेषको वा विशिशेष यस्याः
श्रियन्त्रिलोकीतिलकः स एव ॥
स्नग्धाञ्जनस्यमरुचिः सुवृत्तः
बद्वा इवाद्वंसितवर्णकान्तेः ।
विशेषको वा विशिशेष यस्याः
श्रियन्त्रिलोकीतिलकः स एव ॥
बद्वा इवाद्वंसितवर्णकान्तेः ।
विशेषको वा विशिशेष यस्याः
श्रियन्त्रिलोकीतिलकः स एव ॥
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्न | ग्धा | ञ्ज | न | स्य | म | रु | चिः | सु | वृ | त्तः |
| ब | द्वा | इ | वा | द्वं | सि | त | व | र्ण | का | न्तेः |
| वि | शे | ष | को | वा | वि | शि | शे | ष | य | स्याः |
| श्रि | य | न्त्रि | लो | की | ति | ल | कः | स | ए | व |
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