निषेव्यमाणेन शिवैमरुद्भि-
रध्यास्यमाना हरिणा चिराय ।
उद्रश्मिरत्नाङ्कुरधाम्नि सिन्धा-
वाहास्त मेरावमरावतीं या ॥
निषेव्यमाणेन शिवैमरुद्भि-
रध्यास्यमाना हरिणा चिराय ।
उद्रश्मिरत्नाङ्कुरधाम्नि सिन्धा-
वाहास्त मेरावमरावतीं या ॥
रध्यास्यमाना हरिणा चिराय ।
उद्रश्मिरत्नाङ्कुरधाम्नि सिन्धा-
वाहास्त मेरावमरावतीं या ॥
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | षे | व्य | मा | णे | न | शि | वै | म | रु | द्भि |
| र | ध्या | स्य | मा | ना | ह | रि | णा | चि | रा | य |
| उ | द्र | श्मि | र | त्ना | ङ्कु | र | धा | म्नि | सि | न्धा |
| वा | हा | स्त | मे | रा | व | म | रा | व | तीं | या |
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