मल्लिनाथः
तस्येत्यादिद्वयेन ॥ ये च तस्य चैद्यस्य मित्राणि नृपाः, ये च ते तवामित्रा नृपास्त उभये त्वयाभियुक्तमभियातमेनं चैद्यं गन्तारो गमिष्यन्ति । गमेः कर्तरि लुट् । अतः परे उक्तोभयव्यतिरिक्ताः तव मित्राणि तस्यामित्राश्वेत्यर्थः । त्वां गन्तारः
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | मि | त्रा | ण्य | मि | त्रा | स्ते |
| ये | च | ये | चो | भ | ये | नृ | पाः |
| अ | बि | यु | क्तं | त्व | यै | नं | ते |
| ग | न्ता | र | स्त्वा | म | तः | प | रे |
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