कुर्वाणानां साम्परायान्तरायं
भूरेणूनां मृत्युना मार्जनाय ।
सम्मार्जन्यो नूनमुद्धूयमाना
भान्ति स्मोच्चैः केतनानां पताका ॥
कुर्वाणानां साम्परायान्तरायं
भूरेणूनां मृत्युना मार्जनाय ।
सम्मार्जन्यो नूनमुद्धूयमाना
भान्ति स्मोच्चैः केतनानां पताका ॥
भूरेणूनां मृत्युना मार्जनाय ।
सम्मार्जन्यो नूनमुद्धूयमाना
भान्ति स्मोच्चैः केतनानां पताका ॥
मल्लिनाथः
कुर्वाणानामिति ॥ उच्चैरुन्नताः केतनानां ध्वजस्तम्भानां पताका वैजयन्त्यः सांपरायान्तरायं युद्धविघ्नं कुर्वाणानाम् । `अनीकं सांपरायिकम्` इत्यमरः ।&#३२; भूरेणूनां मार्जनाय प्रमार्जनार्थं मृत्युनान्तकेनोद्धूयमानाः प्रकम्प्यमानाः संमार्जन्यः शोधन्य इव भान्ति स्म । `संमार्जनी शोधनी स्यात्` इत्यमरः । नूनमित्युत्प्रेक्षा
छन्दः
शालिनी [११: मततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | र्वा | णा | नां | सा | म्प | रा | या | न्त | रा | यं |
| भू | रे | णू | नां | मृ | त्यु | ना | मा | र्ज | ना | य |
| स | म्मा | र्ज | न्यो | नू | न | मु | द्धू | य | मा | ना |
| भा | न्ति | स्मो | च्चैः | के | त | ना | नां | प | ता | का |
| म | त | त | ग | ग | ||||||
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