तन्वाः पुंसो नन्द गोपात्मजायाः
कंसेनेव स्फोटितायाः गजेन ।
दिव्या मूर्तिर्व्योमगैरुत्पतन्ती
वीक्षामासे विस्मितैश्चण्डिकेव ॥
तन्वाः पुंसो नन्द गोपात्मजायाः
कंसेनेव स्फोटितायाः गजेन ।
दिव्या मूर्तिर्व्योमगैरुत्पतन्ती
वीक्षामासे विस्मितैश्चण्डिकेव ॥
कंसेनेव स्फोटितायाः गजेन ।
दिव्या मूर्तिर्व्योमगैरुत्पतन्ती
वीक्षामासे विस्मितैश्चण्डिकेव ॥
मल्लिनाथः
तन्वा इति ॥ गजेन स्फोटिताया विदारितायाः पुंसः कस्यचिद्वीरस्य तन्वाः शरीरात्कंसेन स्फोटिताया: नन्दगोपात्मजाया नन्दकन्याया इवोत्पतन्ती दिव्या मूर्तिः चण्डिकेव नन्दकन्याशरीरादाविर्भवन्ती कालिकेव विस्मितैर्व्योमगैः खेचरैर्वीक्षामासे वीक्षिता । ईक्षतेः कर्मणि लिट् । `इजादेश्च गुरुमतोऽनृच्छः` (अष्टाध्यायी ३.१.३६ ) इत्याम्प्रत्ययः । मनुष्यभावमुत्सृज्य देवभावं गतेत्यर्थः । उपमा व्यक्ता । पुरा किल दुरात्मनः कंसस्य प्रतारणाय भगवदाज्ञया तन्मायाशक्तिर्नन्दगोपाज्जाता कंसेन हिंसितेति पौराणिकाः
छन्दः
शालिनी [११: मततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | न्वाः | पुं | सो | न | न्द | गो | पा | त्म | जा | याः |
| कं | से | ने | व | स्फो | टि | ता | याः | ग | जे | न |
| दि | व्या | मू | र्ति | र्व्यो | म | गै | रु | त्प | त | न्ती |
| वी | क्षा | मा | से | वि | स्मि | तै | श्च | ण्डि | के | व |
| म | त | त | ग | ग | ||||||
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