घण्डानादो निस्वनो डिण्डिमानां
ग्रैवेयाणामारवो बृंहितानि ।
आमेतीव प्रत्यवोचन्गजाना-
मुत्साहार्थं वाचमाधोरणस्य ॥
घण्डानादो निस्वनो डिण्डिमानां
ग्रैवेयाणामारवो बृंहितानि ।
आमेतीव प्रत्यवोचन्गजाना-
मुत्साहार्थं वाचमाधोरणस्य ॥
ग्रैवेयाणामारवो बृंहितानि ।
आमेतीव प्रत्यवोचन्गजाना-
मुत्साहार्थं वाचमाधोरणस्य ॥
मल्लिनाथः
घण्टानाद इति ॥ घण्टानादः किङ्किण्यादिघोषः डिण्डिमानां वाद्यविशेषाणां निस्वनः । ग्रीवासु भवानां अवेयाणां कण्ठशृङ्खलानां ग्रीवाभ्य एवेति ढक् प्रत्ययः । आरवः बृंहितानि बृंहणानि गजानां उत्साहार्थमाधोरणस्य हस्तिपकस्य । `आधोरणा हस्तिपकाः` इत्यमरः । `वाचं बृंहणादिशब्दं आमेति प्रत्यवोचन्निवैवमेवेत्यनु. कूलमूचिर इवेत्युत्प्रेक्षा । `आमानुगुण्ये सरणे` इत्यमरः
छन्दः
शालिनी [११: मततगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घ | ण्डा | ना | दो | नि | स्व | नो | डि | ण्डि | मा | नां |
| ग्रै | वे | या | णा | मा | र | वो | बृं | हि | ता | नि |
| आ | मे | ती | व | प्र | त्य | वो | च | न्ग | जा | ना |
| मु | त्सा | हा | र्थं | वा | च | मा | धो | र | ण | स्य |
| म | त | त | ग | ग | ||||||
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