छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यं | स | मे | त्य | च | ल | ला | ट | ले | ख | या |
| बि | भ्र | तः | स | प | दि | शं | भु | वि | भ्र | मम् |
| च | ण्ड | मा | रु | त | मि | व | प्र | दी | प | व |
| च्चे | दि | प | स्य | नि | र | वा | द्वि | लो | च | नम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.