मखमाक्षितुं क्षितिपतेरुपेयुषां
परितः प्रकल्पितनिकेतनं बहिः ।
उपरुध्यमानमिव भूभृतां बलैः
पुटभेदनं दनुसुतारिरैक्षत ॥
मखमाक्षितुं क्षितिपतेरुपेयुषां
परितः प्रकल्पितनिकेतनं बहिः ।
उपरुध्यमानमिव भूभृतां बलैः
पुटभेदनं दनुसुतारिरैक्षत ॥
परितः प्रकल्पितनिकेतनं बहिः ।
उपरुध्यमानमिव भूभृतां बलैः
पुटभेदनं दनुसुतारिरैक्षत ॥
मल्लिनाथः
मखमिति ॥ क्षितिपतेर्धर्मराजस्य मखं क्र्ततुमीक्षितुमुपेयुषां ततस्तत आगतानां भूभृतां राज्ञां बलैः सैन्यैः बहिः परितः प्रकल्पितानि निर्मितानि निकेतनानि निवासा यस्य तदत एवोपरुध्यमानं शत्रुसेनावेष्ट्यमानमिव स्थितमित्युत्प्रेक्षा । पुटभेदनं पत्तनं मयकृतमिन्दप्रस्थम् । `पत्तनं पुटभेदनम्` इत्यमरः । दनुसुतारिर्दानवहन्ता हरिः पुरोऽग्रे ऐक्षतापश्यत्
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | ख | मा | क्षि | तुं | क्षि | ति | प | ते | रु | पे | यु | षां |
| प | रि | तः | प्र | क | ल्पि | त | नि | के | त | नं | ब | हिः |
| उ | प | रु | ध्य | मा | न | मि | व | भू | भृ | तां | ब | लैः |
| पु | ट | भे | द | नं | द | नु | सु | ता | रि | रै | क्ष | त |
| स | ज | स | ज | ग | ||||||||
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