गतयोरभेदमिति सैन्ययोस्तयो-
रथ भानुतजह्नुतनयाम्भसोरिव ।
प्रतिनादितामरविमानमानकै-
र्नितरां मुदा परमयेव दध्वने ॥
गतयोरभेदमिति सैन्ययोस्तयो-
रथ भानुतजह्नुतनयाम्भसोरिव ।
प्रतिनादितामरविमानमानकै-
र्नितरां मुदा परमयेव दध्वने ॥
रथ भानुतजह्नुतनयाम्भसोरिव ।
प्रतिनादितामरविमानमानकै-
र्नितरां मुदा परमयेव दध्वने ॥
मल्लिनाथः
गतयोरिति ॥ इति इत्थं गतयोः सैन्ययोः भानुजह्वतनये यमुनाजाह्नव्यौ तयोरम्भसी प्रवाहौ तयोरिवाभेदमैक्यं गतयोः सतोः । `यस्य च भावेन भावलक्षणम्` (अष्टाध्यायी २.३.३७ ) इति सप्तमी । एतेन सैन्ययोरवार्यत्वमुक्तम् । अथ सैन्यमेलनानन्तरम् । आनकैर्मङ्गलदुन्दुभिभिः परमया मुदेव हर्षेणेवेत्युत्प्रेक्षा । प्रतिनादितानि प्रतिध्वनितान्यमरविमानानि द्रष्टुमागत्याम्बरस्थितानि विमानानि देवयानानि यस्मिन्कर्मणि तद्यथा तथा नितरां दध्वने ध्वनितम् । भावे लिट्
छन्दः
मञ्जुभाषिणी [१३: सजसजग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | त | यो | र | भे | द | मि | ति | सै | न्य | यो | स्त | यो | |
| र | थ | भा | नु | त | ज | ह्नु | त | न | या | म्भ | सो | रि | व |
| प्र | ति | ना | दि | ता | म | र | वि | मा | न | मा | न | कै | |
| र्नि | त | रां | मु | दा | प | र | म | ये | व | द | ध्व | ने | |
| स | ज | स | ज | ग | |||||||||
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