कुर्वता मुकुलिताक्षियु-
गानामङ्गसादमवसादितवगचाम् ।
ईर्ष्ययेव हरता ह्रिय-
मासां तद्गुणः स्वयमकारि मदेन ॥
कुर्वता मुकुलिताक्षियु-
गानामङ्गसादमवसादितवगचाम् ।
ईर्ष्ययेव हरता ह्रिय-
मासां तद्गुणः स्वयमकारि मदेन ॥
गानामङ्गसादमवसादितवगचाम् ।
ईर्ष्ययेव हरता ह्रिय-
मासां तद्गुणः स्वयमकारि मदेन ॥
मल्लिनाथः
कुर्वतेति ॥ मुकुलिताक्षियुगानामवसादितवाचां कुण्ठितगिरामासां स्त्रीणां अङ्गसादं अङ्गसादरूपशरीरनिश्चेष्टतां कुर्वता ह्रियं हरता मदेन ईर्ष्ययेवेत्युत्प्रेक्षा । तस्या ह्रियो गुणस्तद्गुणः अक्षिनिमीलनवाक्सादाङ्गसादरूपः । स्वयमकारि कृतः । ह्रीमदयोस्तुल्यानुभाविकत्वादिति भावः
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कु | र्व | ता | मु | कु | लि | ता | क्षि | यु | |||||
| गा | ना | म | ङ्ग | सा | द | म | व | सा | दि | त | व | ग | चाम् |
| ई | र्ष्य | ये | व | ह | र | ता | ह्रि | य | |||||
| मा | सां | त | द्गु | णः | स्व | य | म | का | रि | म | दे | न |
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