मल्लिनाथः
सावशेषमिति ॥ सावशेषाण्योक्तानि पदानि यस्मिंस्तदुक्तमुक्तिर्वाक्यं स्रस्तेषु माल्यवसनाभरणेषूपेक्षाऽनादरः अकारणतोऽकस्मादेव गन्तुमुत्थितमुत्थानं च आसां स्त्रीणां मदविभ्रमं मदविकारं द्योतयन्ति स्म । एतैरनुभावैरासां मदसंचारो ज्ञात इत्यर्थः । अत्रार्थोक्तादीनां खलेकपोतिकया मदद्योतने प्रवृत्तत्वात्कारणाख्यो द्वितीयसमुच्चयः । `खलेकपोतन्यायेन बहूनां कार्यसाधने । कारणानां समुद्योगः स द्वितीयः समुच्चयः ॥ इति लक्षणात्
छन्दः
आर्यागीतिः []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | व | शे | ष | प | द | मु | क्त | मु | ||||
| पे | क्षा | स्र | स्त | मा | ल्य | व | स | ना | भ | र | णे | षु |
| ग | न्तु | मु | त्थि | म | का | र | ण | |||||
| तः | स्म | द्यो | त | य | न्ति | म | द | वि | भ्र | म | मा | साम् |
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