महाशय्या पृथ्वी विपुलमुपधानं भुजलतां
वितानं चाकाशं व्यजनमनुकूलोऽयमनिलः ।
शरच्चन्द्रो दीपो विरतिवनितासङ्गमुदितः
सुखी शान्तः शेते मुनिरतनुभूतिर्नृप इव ॥
महाशय्या पृथ्वी विपुलमुपधानं भुजलतां
वितानं चाकाशं व्यजनमनुकूलोऽयमनिलः ।
शरच्चन्द्रो दीपो विरतिवनितासङ्गमुदितः
सुखी शान्तः शेते मुनिरतनुभूतिर्नृप इव ॥
वितानं चाकाशं व्यजनमनुकूलोऽयमनिलः ।
शरच्चन्द्रो दीपो विरतिवनितासङ्गमुदितः
सुखी शान्तः शेते मुनिरतनुभूतिर्नृप इव ॥
अन्वयः
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मुनिः पृथ्वी महा-शय्या, विपुलम् भुज-लता उपधानम्, आकाशम् च वितानम्, अयम् अनुकूलः अनिलः व्यजनम्, शरत्-चन्द्रः दीपः (इति कृत्वा) विरति-वनिता-सङ्ग-मुदितः, सुखी, शान्तः, अतनु-भूतिः (सन्) नृपः इव शेते ।
Summary
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For a sage, the earth is a great bed, his own arm a large pillow, the sky a canopy, the favorable wind a fan, and the autumn moon a lamp. Delighted in the company of his wife, Dispassion, the happy and peaceful sage, possessing immense spiritual wealth, sleeps like a king.
सारांश
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पृथ्वी जिसकी शय्या और आकाश जिसका शामियाना है, ऐसा विरक्त मुनि संतोष रूपी धन के साथ किसी राजा की भाँति परम शांति से अपनी निद्रा पूरी करता है।
पदच्छेदः
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| महा-शय्या | महा–शय्या (१.१) | a great bed |
| पृथ्वी | पृथ्वी (१.१) | is the Earth |
| विपुलम् | विपुल (१.१) | a large |
| उपधानं | उपधान (१.१) | pillow |
| भुज-लता | भुज–लता (१.१) | is the creeper-like arm |
| वितानं | वितान (१.१) | a canopy |
| च | च | and |
| आकाशं | आकाश (१.१) | is the sky |
| व्यजनम् | व्यजन (१.१) | a fan |
| अनुकूलः | अनुकूल (१.१) | is the favorable |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अनिलः | अनिल (१.१) | wind |
| शरच्-चन्द्रः | शरद्–चन्द्र (१.१) | the autumn moon |
| दीपः | दीप (१.१) | is a lamp |
| विरति-वनिता-सङ्ग-मुदितः | विरति–वनिता–सङ्ग–मुदित (१.१) | delighted in the company of his wife, Dispassion |
| सुखी | सुखिन् (१.१) | happy |
| शान्तः | शान्त (√शम्+क्त, १.१) | and peaceful |
| शेते | शेते (√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | sleeps |
| मुनिः | मुनि (१.१) | the sage |
| अतनु-भूतिः | अतनु–भूति (१.१) | possessing immense wealth |
| नृप | नृप (१.१) | a king |
| इव | इव | like |
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हा | श | य्या | पृ | थ्वी | वि | पु | ल | मु | प | धा | नं | भु | ज | ल | तां |
| वि | ता | नं | चा | का | शं | व्य | ज | न | म | नु | कू | लो | ऽय | म | नि | लः |
| श | र | च्च | न्द्रो | दी | पो | वि | र | ति | व | नि | ता | स | ङ्ग | मु | दि | तः |
| सु | खी | शा | न्तः | शे | ते | मु | नि | र | त | नु | भू | ति | र्नृ | प | इ | व |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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