कौपीनं शतखण्डजर्जरतरं कन्था पुनस्तादृशी
नैश्चिन्त्यं निरपेक्षभैक्ष्यमशनं निद्रा श्मशाने वने ।
स्वातन्त्र्येण निरङ्कुशं विहरणं स्वान्तं प्रशान्तं सदा
स्थैर्यं योगमहोत्सवेऽपि च यदि त्रैलोक्यराज्येन किम् ॥
कौपीनं शतखण्डजर्जरतरं कन्था पुनस्तादृशी
नैश्चिन्त्यं निरपेक्षभैक्ष्यमशनं निद्रा श्मशाने वने ।
स्वातन्त्र्येण निरङ्कुशं विहरणं स्वान्तं प्रशान्तं सदा
स्थैर्यं योगमहोत्सवेऽपि च यदि त्रैलोक्यराज्येन किम् ॥
नैश्चिन्त्यं निरपेक्षभैक्ष्यमशनं निद्रा श्मशाने वने ।
स्वातन्त्र्येण निरङ्कुशं विहरणं स्वान्तं प्रशान्तं सदा
स्थैर्यं योगमहोत्सवेऽपि च यदि त्रैलोक्यराज्येन किम् ॥
अन्वयः
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यदि शत-खण्ड-जर्जर-तरम् कौपीनम्, पुनः तादृशी कन्था, नैश्चिन्त्यम्, निरपेक्ष-भैक्ष्यम् अशनम्, श्मशाने वने निद्रा, स्वातन्त्र्येण निरङ्कुशम् विहरणम्, सदा प्रशान्तम् स्वान्तम्, योग-महा-उत्सवे अपि च स्थैर्यम् (अस्ति), (तर्हि) त्रैलोक्य-राज्येन किम्?
Summary
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If one has a loincloth tattered into a hundred pieces, a similarly ragged quilt, freedom from anxiety, food from impartial begging, sleep in a cremation ground or forest, unrestricted wandering with independence, a mind always serene, and steadfastness even in the great festival of yoga—then what is the use of the kingdom of the three worlds?
सारांश
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फटे हुए वस्त्र और भिक्षा का भोजन होने पर भी यदि मन में अटूट शांति और स्वतंत्रता है, तो फिर तीनों लोकों के राज्य का भी कोई मोह शेष नहीं रह जाता।
पदच्छेदः
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| कौपीनं | कौपीन (१.१) | a loincloth |
| शत-खण्ड-जर्जरतरं | शत–खण्ड–जर्जरतर (१.१) | more tattered into a hundred pieces |
| कन्था | कन्था (१.१) | a patched garment |
| पुनः | पुनर् | again |
| तादृशी | तादृश (१.१) | of the same kind |
| नैश्चिन्त्यं | नैश्चिन्त्य (१.१) | freedom from anxiety |
| निरपेक्ष-भैक्ष्यमशनं | निरपेक्ष–भैक्ष्य–अशन (१.१) | food from impartial begging |
| निद्रा | निद्रा (१.१) | sleep |
| श्मशाने | श्मशान (७.१) | in a cremation ground |
| वने | वन (७.१) | in a forest |
| स्वातन्त्र्येण | स्वातन्त्र्य (३.१) | with independence |
| निरङ्कुशं | निरङ्कुश (२.१) | unrestricted |
| विहरणं | विहरण (१.१) | wandering |
| स्वान्तं | स्वान्त (१.१) | the mind |
| प्रशान्तं | प्रशान्त (प्र√शम्+क्त, १.१) | is completely serene |
| सदा | सदा | always |
| स्थैर्यं | स्थैर्य (१.१) | steadfastness |
| योग-महोत्सवेऽपि | योग–महा–उत्सव (७.१)–अपि | even in the great festival of yoga |
| च | च | and |
| यदि | यदि | if |
| त्रैलोक्य-राज्येन | त्रैलोक्य–राज्य (३.१) | with the kingdom of the three worlds |
| किम् | किम् | what (is the use) |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कौ | पी | नं | श | त | ख | ण्ड | ज | र्ज | र | त | रं | क | न्था | पु | न | स्ता | दृ | शी |
| नै | श्चि | न्त्यं | नि | र | पे | क्ष | भै | क्ष्य | म | श | नं | नि | द्रा | श्म | शा | ने | व | ने |
| स्वा | त | न्त्र्ये | ण | नि | र | ङ्कु | शं | वि | ह | र | णं | स्वा | न्तं | प्र | शा | न्तं | स | दा |
| स्थै | र्यं | यो | ग | म | हो | त्स | वे | ऽपि | च | य | दि | त्रै | लो | क्य | रा | ज्ये | न | किम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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