कदा वाराणस्याममरतटिनीरोधसि वस-
न्वसानः कौपीनं शिरसि निदधानोऽञ्जलिपुटम् ।
अये गौरीनाथ त्रिपुरहर शम्भो त्रिनयन
प्रसीदेत्याक्रोशन्निमिषमिव नेष्यामि दिवसान् ॥

अन्वयः AI अहम् कदा वाराणस्याम् अमर-तटिनी-रोधसि वसन्, कौपीनम् वसानः, शिरसि अञ्जलि-पुटम् निदधानः, 'अये गौरी-नाथ, त्रिपुर-हर, शम्भो, त्रि-नयन, प्रसीद' इति आक्रोशन् दिवसान् निमिषम् इव नेष्यामि?
Summary AI When will I, dwelling on the banks of the celestial river in Varanasi, wearing a loincloth, placing my cupped hands on my head, and crying out, 'O Lord of Gauri, Destroyer of Tripura, Shambhu, Three-eyed one, be pleased!', pass my days as if they were but a moment?
सारांश AI मैं कब वाराणसी में गंगा किनारे केवल एक लंगोटी पहनकर, हाथ जोड़कर 'हे गौरीनाथ, हे शंभू' पुकारते हुए अपने दिन क्षणों की तरह बिता सकूँगा?
पदच्छेदः AI
कदाकदा when
वाराणस्याम्वाराणसी (७.१) in Varanasi
अमर-तटिनी-रोधसिअमरतटिनीरोधस् (७.१) on the bank of the river of gods
वसन्वसन् (√वस्+शतृ, १.१) dwelling
वसानःवसान (√वस्+शानच्, १.१) wearing
कौपीनंकौपीन (२.१) a loincloth
शिरसिशिरस् (७.१) on the head
निदधानःनिदधान (नि√धा+शानच्, १.१) placing
अञ्जलि-पुटम्अञ्जलिपुट (२.१) cupped hands
अयेअये Oh
गौरीनाथगौरीनाथ (८.१) Lord of Gauri
त्रिपुरहरत्रिपुरहर (८.१) Destroyer of Tripura
शम्भोशम्भु (८.१) Shambhu
त्रिनयनत्रिनयन (८.१) Three-eyed one
प्रसीदप्रसीद (प्र√सद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) be pleased
इतिइति thus
आक्रोशन्आक्रोशन् (आ√क्रुश्+शतृ, १.१) crying out
निमिषम्निमिष (२.१) a moment
इवइव like
नेष्यामिनेष्यामि (√नी कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) I shall pass
दिवसान्दिवस (२.३) the days
छन्दः शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
दा वा रा स्या टि नी रो सि
न्व सा नः कौ पी नं शि सि नि धा नो ऽञ्ज लि पु
ये गौ री ना त्रि पु म्भो त्रि
प्र सी दे त्या क्रो न्नि मि मि ने ष्या मि दि सान्
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