माने म्लायिनि खण्डिते च वसुनि व्यर्थे प्रयातेऽर्थिनि
क्षीणे बन्धुजने गते परिजने नष्टे शनैर्यौवने ।
युक्तं केवलमेतदेव सुधियां यज्जह्नुकन्यापयः-
पूताग्राव गिरीन्द्रकन्दरतटीकुञ्जे निवासः क्वचित् ॥

अन्वयः AI माने म्लायिनि, वसुनि च खण्डिते, अर्थिनि व्यर्थे प्रयाते, बन्धु-जने क्षीणे, परिजने गते, यौवने शनैः नष्टे (सति), सुधियाम् केवलम् एतत् एव युक्तम्, यत् क्वचित् जह्नु-कन्या-पयः-पूत-अग्र-अव-गिरीन्द्र-कन्दर-तटी-कुञ्जे निवासः।
Summary AI When honor fades, wealth is lost, supplicants depart empty-handed, relatives dwindle, attendants leave, and youth slowly perishes, the only fitting thing for the wise is to reside somewhere in a bower on the bank of a mountain cave, purified by the waters of the Ganges.
सारांश AI जब मान-सम्मान घट जाए, धन नष्ट हो जाए और यौवन ढल जाए, तब बुद्धिमानों के लिए हिमालय की उन गुफाओं में रहना ही श्रेष्ठ है जो गंगा के जल से पवित्र हैं।
पदच्छेदः AI
मानेमान (७.१) when honor
म्लायिनिम्लायिन् (७.१) has faded
खण्डितेखण्डित (√खण्ड्+क्त, ७.१) is broken/diminished
and
वसुनिवसु (७.१) when wealth
व्यर्थेव्यर्थ (७.१) in vain
प्रयातेप्रयात (प्र√या+क्त, ७.१) has gone away
अर्थिनिअर्थिन् (७.१) when a supplicant
क्षीणेक्षीण (√क्षि+क्त, ७.१) has dwindled
बन्धु-जनेबन्धुजन (७.१) when relatives
गतेगत (√गम्+क्त, ७.१) have gone
परिजनेपरिजन (७.१) when attendants
नष्टेनष्ट (√नश्+क्त, ७.१) is lost
शनैःशनैस् slowly
यौवनेयौवन (७.१) when youth
युक्तम्युक्त (√युज्+क्त, १.१) it is fitting
केवलम्केवल (१.१) only
एतत्एतद् (१.१) this
एवएव indeed
सुधियाम्सुधी (६.३) for the wise
यत्यद् (१.१) that
जह्नु-कन्या-पयः-पूत-अग्र-अव-गिरीन्द्र-कन्दर-तटी-कुञ्जेजह्नु-कन्यापयस्पूतअग्रअवगिरीन्द्रकन्दरतटीकुञ्ज (७.१) in a bower on the bank of a cave of the king of mountains, whose peaks are purified by the waters of Jahnu's daughter (Ganges)
निवासःनिवास (१.१) residence
क्वचित्क्वचित् somewhere
छन्दः शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९
मा ने म्ला यि नि ण्डि ते सु नि व्य र्थे प्र या ते ऽर्थि नि
क्षी णे न्धु ने ते रि ने ष्टे नै र्यौ ने
यु क्तं के मे दे सु धि यां ज्ज ह्नु न्या यः
पू ता ग्रा गि री न्द्र न्द टी कु ञ्जे नि वा सः क्व चित्
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