दुराराध्याश्चामी तुरगचलचित्ताः क्षितिभुजो
वयं तु स्थूलेच्छाः सुमहति फले बद्धमनसः ।
जरा देहं मृत्युर्हरति दयितं जीवितमिदं
सखे नान्यच्छ्रेयो जगति विदुषेऽन्यत्र तपसः ॥

अन्वयः AI सखे, अमी तुरग-चल-चित्ताः क्षितिभुजः दुराराध्याः च। वयम् तु स्थूल-इच्छाः सुमहति फले बद्ध-मनसः। जरा देहम्, मृत्युः दयितम् इदम् जीवितम् हरति। जगति विदुषे तपसः अन्यत्र अन्यत् श्रेयः न (अस्ति)।
Summary AI O friend, these kings, with minds as fickle as horses, are hard to please. We, however, have great desires and have set our minds on a great reward. Old age takes the body, and death takes this beloved life. For a wise person in this world, there is no greater good than austerity.
सारांश AI राजाओं का मन चंचल है और उन्हें प्रसन्न करना कठिन है, हमारी इच्छाएँ बड़ी हैं। बुढ़ापा शरीर को और मृत्यु जीवन को छीन रही है। हे मित्र! तपस्या के सिवा विद्वान के लिए कल्याण का कोई और मार्ग नहीं है।
पदच्छेदः AI
दुराराध्याःदुराराध्य (१.३) difficult to please
and
अमीअदस् (१.३) these
तुरग-चल-चित्ताःतुरगचलचित्त (१.३) whose minds are as fickle as horses
क्षितिभुजःक्षितिभुज् (१.३) kings
वयम्अस्मद् (१.१) we
तुतु but
स्थूल-इच्छाःस्थूलइच्छा (१.३) having great desires
सुमहतिसुमहत् (७.१) in a very great
फलेफल (७.१) fruit/reward
बद्ध-मनसःबद्धमनस् (१.३) with minds fixed
जराजरा (१.१) old age
देहम्देह (२.१) the body
मृत्युःमृत्यु (१.१) death
हरतिहरति (√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) takes away
दयितम्दयित (२.१) beloved
जीवितम्जीवित (२.१) life
इदम्इदम् (२.१) this
सखेसखि (८.१) O friend
not
अन्यत्अन्य (१.१) other
श्रेयःश्रेयस् (१.१) good/welfare
जगतिजगत् (७.१) in the world
विदुषेविद्वस् (४.१) for a wise person
अन्यत्रअन्यत्र other than
तपसःतपस् (५.१) from austerity
छन्दः शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
दु रा रा ध्या श्चा मी तु चि त्ताः क्षि ति भु जो
यं तु स्थू ले च्छाः सु ति ले द्ध सः
रा दे हं मृ त्यु र्ह ति यि तं जी वि मि दं
खे ना न्य च्छ्रे यो ति वि दु षे ऽन्य त्र सः
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