तस्मादनन्तमजरं परमं विकासि
तद्ब्रह्म चिन्तय किमेभिरसद्विकल्पैः ।
यस्यानुषङ्गिण इमे भुवनाधिपत्य-
भोगादयः कृपणलोकमता भवन्ति ॥
तस्मादनन्तमजरं परमं विकासि
तद्ब्रह्म चिन्तय किमेभिरसद्विकल्पैः ।
यस्यानुषङ्गिण इमे भुवनाधिपत्य-
भोगादयः कृपणलोकमता भवन्ति ॥
तद्ब्रह्म चिन्तय किमेभिरसद्विकल्पैः ।
यस्यानुषङ्गिण इमे भुवनाधिपत्य-
भोगादयः कृपणलोकमता भवन्ति ॥
अन्वयः
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तस्मात् अनन्तम् अजरम् परमम् विकासि तत् ब्रह्म चिन्तय। एभिः असत्-विकल्पैः किम्? यस्य इमे भुवनाधिपत्य-भोगादयः आनुषङ्गिणः (सन्तः) कृपण-लोक-मताः भवन्ति।
Summary
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Therefore, contemplate that endless, undecaying, supreme, and luminous Brahman. What is the use of these unreal notions? Compared to Brahman, even lordship over the worlds and its enjoyments are incidental and considered significant only by the wretched.
सारांश
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उस अनंत और अविनाशी ब्रह्म का चिंतन करो। सांसारिक आधिपत्य और भोग तो उस परमात्मा के आनंद के सामने अत्यंत तुच्छ और दीन जनों के विचार जैसे प्रतीत होते हैं।
पदच्छेदः
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| तस्मात् | तस्मात् | therefore |
| अनन्तम् | अनन्त (२.१) | endless |
| अजरम् | अजर (२.१) | undecaying |
| परमम् | परम (२.१) | supreme |
| विकासि | विकासिन् (२.१) | luminous |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| ब्रह्म | ब्रह्मन् (२.१) | Brahman |
| चिन्तय | चिन्तय (√चिन्त् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | contemplate |
| किम् | किम् (१.१) | what (is the use) |
| एभिः | इदम् (३.३) | with these |
| असत्-विकल्पैः | असत्–विकल्प (३.३) | with unreal thought-constructs |
| यस्य | यद् (६.१) | of which |
| आनुषङ्गिणः | आनुषङ्गिन् (१.३) | incidental/secondary |
| इमे | इदम् (१.३) | these |
| भुवनाधिपत्य-भोगादयः | भुवनाधिपत्य–भोग–आदि (१.३) | lordship over the worlds, enjoyments, and so on |
| कृपण-लोक-मताः | कृपण–लोक–मत (१.३) | considered (important) by wretched people |
| भवन्ति | भवन्ति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | become |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मा | द | न | न्त | म | ज | रं | प | र | मं | वि | का | सि |
| त | द्ब्र | ह्म | चि | न्त | य | कि | मे | भि | र | स | द्वि | क | ल्पैः |
| य | स्या | नु | ष | ङ्गि | ण | इ | मे | भु | व | ना | धि | प | त्य |
| भो | गा | द | यः | कृ | प | ण | लो | क | म | ता | भ | व | न्ति |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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