मृत्पिण्डो जलरेखया बलयतिः सर्वोऽप्ययं नन्वणुः
स्वांशीकृत्य स एव सङ्गरशतै राज्ञां गणा भुञ्जते ।
ये दद्युर्ददतोऽथवा किमपरं क्षुद्रा दरिद्रं भृशं
धिग्धिक्तान्पुरुषाधमान्धनकणान्वाञ्छन्ति तेभ्योऽपि ये ॥
मृत्पिण्डो जलरेखया बलयतिः सर्वोऽप्ययं नन्वणुः
स्वांशीकृत्य स एव सङ्गरशतै राज्ञां गणा भुञ्जते ।
ये दद्युर्ददतोऽथवा किमपरं क्षुद्रा दरिद्रं भृशं
धिग्धिक्तान्पुरुषाधमान्धनकणान्वाञ्छन्ति तेभ्योऽपि ये ॥
स्वांशीकृत्य स एव सङ्गरशतै राज्ञां गणा भुञ्जते ।
ये दद्युर्ददतोऽथवा किमपरं क्षुद्रा दरिद्रं भृशं
धिग्धिक्तान्पुरुषाधमान्धनकणान्वाञ्छन्ति तेभ्योऽपि ये ॥
अन्वयः
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अयम् सर्वः अपि मृत्-पिण्डः जल-रेखया वलयितः अणुः ननु । सः एव राज्ञाम् गणाः सङ्गर-शतैः स्वांशीकृत्य भुञ्जते । ये दद्युः अथवा ददतः, किम् अपरम्? ये तेभ्यः अपि धन-कणान् वाञ्छन्ति, तान् क्षुद्रान् भृशम् दरिद्रान् पुरुषाधमान् धिक् धिक् ।
Summary
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This entire earth, encircled by the ocean, is but a lump of clay, a mere atom. Hosts of kings enjoy it after making it their own through hundreds of battles. What more can be said of those who give or might give? Fie, fie upon those lowest of men who desire even particles of wealth from these petty and poor rulers.
सारांश
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यह संपूर्ण पृथ्वी जल की रेखा से घिरी मिट्टी के एक छोटे पिंड जैसी है, जिसके अंशों के लिए राजा आपस में युद्ध करते हैं। उन तुच्छ राजाओं से धन की याचना करने वाले अधम पुरुषों को धिक्कार है।
पदच्छेदः
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| मृत्-पिण्डः | मृद्–पिण्ड (१.१) | a lump of clay |
| जल-रेखया | जल–रेखा (३.१) | by a line of water (the ocean) |
| वलयितः | वलयित (१.१) | is encircled |
| सर्वः | सर्व (१.१) | all |
| अपि | अपि | this |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| ननु | ननु | indeed |
| अणुः | अणु (१.१) | is a mere atom |
| स्वांशीकृत्य | स्व–अंश–स्वांशीकृत्य (√कृ+च्वि+ल्यप्) | having made it their own portion |
| सः | तद् (१.१) | that very thing |
| एव | एव | indeed |
| सङ्गर-शतैः | सङ्गर–शत (३.३) | through hundreds of battles |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of kings |
| गणाः | गण (१.३) | hosts |
| भुञ्जते | भुञ्जते (√भुज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | enjoy |
| ये | यद् (१.३) | those who |
| दद्युः | दद्युः (√दा कर्तरि लिङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | might give |
| ददतः | ददत् (√दा+शतृ, १.३) | or are giving |
| अथवा | अथवा | or |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| अपरम् | अपर (१.१) | else |
| क्षुद्रान् | क्षुद्र (२.३) | the petty |
| दरिद्रान् | दरिद्र (२.३) | and the poor |
| भृशम् | भृशम् | greatly |
| धिक् | धिक् | fie |
| धिक् | धिक् | fie |
| तान् | तद् (२.३) | on them |
| पुरुषाधमान् | पुरुष–अधम (२.३) | the lowest of men |
| धन-कणान् | धन–कण (२.३) | particles of wealth |
| वाञ्छन्ति | वाञ्छन्ति (√वाञ्छ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | desire |
| तेभ्यः | तद् (५.३) | from them |
| अपि | अपि | even |
| ये | यद् (१.३) | who |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मृ | त्पि | ण्डो | ज | ल | रे | ख | या | ब | ल | य | तिः | स | र्वो | ऽप्य | यं | न | न्व | णुः |
| स्वां | शी | कृ | त्य | स | ए | व | स | ङ्ग | र | श | तै | रा | ज्ञां | ग | णा | भु | ञ्ज | ते |
| ये | द | द्यु | र्द | द | तो | ऽथ | वा | कि | म | प | रं | क्षु | द्रा | द | रि | द्रं | भृ | शं |
| धि | ग्धि | क्ता | न्पु | रु | षा | ध | मा | न्ध | न | क | णा | न्वा | ञ्छ | न्ति | ते | भ्यो | ऽपि | ये |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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