न ध्यानं पदमीश्वरस्य विधिवत्संसारविच्छित्तये
स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुर्धर्मोऽपि नोपार्जितः ।
नारीपीनपयोधरोरुयुगलं स्वप्नेऽपि नालिङ्गितं
मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम् ॥
न ध्यानं पदमीश्वरस्य विधिवत्संसारविच्छित्तये
स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुर्धर्मोऽपि नोपार्जितः ।
नारीपीनपयोधरोरुयुगलं स्वप्नेऽपि नालिङ्गितं
मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम् ॥
स्वर्गद्वारकपाटपाटनपटुर्धर्मोऽपि नोपार्जितः ।
नारीपीनपयोधरोरुयुगलं स्वप्नेऽपि नालिङ्गितं
मातुः केवलमेव यौवनवनच्छेदे कुठारा वयम् ॥
अन्वयः
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संसार-विच्छित्तये ईश्वरस्य पदम् विधिवत् न ध्यानम् (कृतम्) । स्वर्ग-द्वार-कपाट-पाटन-पटुः धर्मः अपि न उपार्जितः । नारी-पीन-पयोधर-उरु-युगलम् स्वप्ने अपि न आलिङ्गितम् । वयम् केवलम् एव मातुः यौवन-वन-च्छेदे कुठाराः (अभवम) ।
Summary
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We have not duly meditated on the Lord's state for liberation from worldly existence. Nor have we earned righteousness, which is skilled in breaking open heaven's gates. We have not embraced the full breasts and thighs of women even in a dream. We have merely been axes, cutting down the forest of our mother's youth.
सारांश
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न तो हमने ईश्वर का ध्यान किया, न पुण्य कमाया और न ही सांसारिक सुखों को भोगा। हम केवल अपनी माता के यौवन रूपी वन को काटने के लिए कुल्हाड़ी के समान सिद्ध हुए, जिससे उसे केवल कष्ट ही मिला।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| ध्यानम् | ध्यान (√ध्यै+ल्युट्, १.१) | meditation |
| पदम् | पद (२.१) | state/feet |
| ईश्वरस्य | ईश्वर (६.१) | of the Lord |
| विधिवत् | विधिवत् | according to rules |
| संसार-विच्छित्तये | संसार–विच्छित्ति (४.१) | for the cessation of worldly existence |
| स्वर्ग-द्वार-कपाट-पाटन-पटुः | स्वर्ग–द्वार–कपाट–पाटन–पटु (१.१) | skilled in breaking open the gates of heaven |
| धर्मः | धर्म (१.१) | righteousness |
| अपि | अपि | also |
| न | न | not |
| उपार्जितः | उपार्जित (उप√अर्ज्+क्त, १.१) | earned |
| नारी-पीन-पयोधर-उरु-युगलम् | नारी–पीन–पयोधर–उरु–युगल (२.१) | the pair of full breasts and thighs of a woman |
| स्वप्ने | स्वप्न (७.१) | in a dream |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| आलिङ्गितम् | आलिङ्गित (आ√लिङ्ग्+क्त, १.१) | embraced |
| मातुः | मातृ (६.१) | of (our) mother |
| केवलम् | केवल | only |
| एव | एव | just |
| यौवन-वन-च्छेदे | यौवन–वन–च्छेद (७.१) | in cutting down the forest of youth |
| कुठाराः | कुठार (१.३) | axes |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | we |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ध्या | नं | प | द | मी | श्व | र | स्य | वि | धि | व | त्सं | सा | र | वि | च्छि | त्त | ये |
| स्व | र्ग | द्वा | र | क | पा | ट | पा | ट | न | प | टु | र्ध | र्मो | ऽपि | नो | पा | र्जि | तः |
| ना | री | पी | न | प | यो | ध | रो | रु | यु | ग | लं | स्व | प्ने | ऽपि | ना | लि | ङ्गि | तं |
| मा | तुः | के | व | ल | मे | व | यौ | व | न | व | न | च्छे | दे | कु | ठा | रा | व | यम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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