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यत्रानेकः क्वचिदपि गृहे तत्र तिष्ठत्यथैको
यत्राप्येकस्तदनु बहवस्तत्र नैकोऽपि चान्ते ।
इत्थं नयौ रजनिदिवसौ लोलयन्द्वाविवाक्षौ
कालः कल्यो भुवनफलके क्रडति प्राणिशारैः ॥

अन्वयः AI क्वचित् गृहे यत्र अनेकः (तिष्ठति), तत्र अथ एकः तिष्ठति । यत्र अपि एकः (तिष्ठति), तत् अनु बहवः (भवन्ति), च अन्ते तत्र एकः अपि न (तिष्ठति) । इत्थम् रजनि-दिवसौ द्वौ अक्षौ इव लोलयन्, कल्यः कालः भुवन-फलके प्राणि-शारैः क्रीडति ।
Summary AI In a house where there were once many, only one remains; where there was one, many follow; and in the end, not even one is left. Thus, Time, the expert player, rolls night and day like two dice and plays on the board of the world with living beings as its pieces.
सारांश AI काल रूपी खिलाड़ी इस संसार की बिसात पर प्राणियों को मोहरों की तरह नचा रहा है। वह दिन और रात के पाँसों से खेलता हुआ कभी भीड़ भरे घर को सूना कर देता है और कभी सूने को भीड़ से भर देता है।
पदच्छेदः AI
यत्रयत्र where
अनेकःअनेक (१.१) many
क्वचित्क्वचित् somewhere
अपिअपि also
गृहेगृह (७.१) in a house
तत्रतत्र there
तिष्ठतितिष्ठति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) stays
अथअथ then
एकःएक (१.१) one
यत्रयत्र where
अपिअपि also
एकःएक (१.१) one
तत्तद् that
अनुअनु after
बहवःबहु (१.३) many
तत्रतत्र there
not
एकःएक (१.१) one
अपिअपि even
and
अन्तेअन्त (७.१) in the end
इत्थम्इत्थम् thus
रजनि-दिवसौरजनिदिवस (२.२) night and day
लोलयन्लोलयन् (√लुल्+णिच्+शतृ, १.१) rolling
द्वौद्वि (२.२) two
इवइव like
अक्षौअक्ष (२.२) dice
कालःकाल (१.१) Time
कल्यःकल्य (१.१) expert
भुवन-फलकेभुवनफलक (७.१) on the board of the world
क्रीडतिक्रीडति (√क्रीड् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) plays
प्राणि-शारैःप्राणिन्शार (३.३) with living beings as game pieces
छन्दः उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
त्रा ने कः क्व चि पि गृ हे त्र ति ष्ठ त्य थै को
त्रा प्ये स्त नु स्त त्र नै को ऽपि चा न्ते
त्थं यौ नि दि सौ लो न्द्वा वि वा क्षौ
का लः ल्यो भु के क्र ति प्रा णि शा रैः
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