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फलं स्वेच्छालभ्यं प्रतिवनमखेदं क्षितिरुहां
पयः स्थाने स्थाने शिशिरमधुरं पुण्यसरिताम् ।
मृदुस्पर्शा शय्या सुललितलतापल्लवमयी
सहन्ते सन्तापं तदपि धनिनां द्वारि कृपणाः ॥

अन्वयः AI प्रतिवनम् क्षितिरुहाम् फलम् अखेदम् स्वेच्छा-लभ्यम् (अस्ति) । स्थाने स्थाने पुण्य-सरिताम् शिशिर-मधुरम् पयः (अस्ति) । सुललित-लता-पल्लव-मयी मृदु-स्पर्शा शय्या (अस्ति) । तथापि कृपणाः धनिनाम् द्वारि सन्तापम् सहन्ते ।
Summary AI In every forest, the fruit of trees is effortlessly available at will. In every place, there is cool, sweet water from holy rivers. A soft bed made of beautiful creepers and sprouts is available. And yet, wretched people endure distress at the doors of the wealthy.
सारांश AI वृक्षों पर फल सुलभ हैं, नदियों में शीतल जल है और धरती पर कोमल पत्तों की शय्या है। फिर भी लोभी मनुष्य धनिकों के द्वारों पर अपमान और कष्ट सहन करते हैं।
पदच्छेदः AI
फलम्फल (१.१) Fruit
स्वेच्छा-लभ्यम्स्वेच्छालभ्य (१.१) is obtainable at will
प्रतिवनम्प्रतिवनम् in every forest
अखेदम्अखेदम् without effort
क्षितिरुहाम्क्षितिरुह् (६.३) of the trees
पयःपयस् (१.१) Water
स्थानेस्थान (७.१) in place
स्थानेस्थान (७.१) after place
शिशिर-मधुरम्शिशिरमधुर (१.१) is cool and sweet
पुण्य-सरिताम्पुण्यसरित् (६.३) of the holy rivers
मृदु-स्पर्शामृदुस्पर्श (१.१) A soft-to-touch
शय्याशय्या (१.१) bed
सुललित-लता-पल्लव-मयीसुललितलतापल्लव–मयट् (१.१) made of beautiful creepers and sprouts (is available)
सहन्तेसहन्ते (√सह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) endure
सन्तापम्सन्ताप (२.१) distress
तदपितदपि even so
धनिनाम्धनिन् (६.३) of the rich
द्वारिद्वार (७.१) at the door
कृपणाःकृपण (१.३) wretched people
छन्दः शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७
लं स्वे च्छा भ्यं प्र ति खे दं क्षि ति रु हां
यः स्था ने स्था ने शि शि धु रं पु ण्य रि ताम्
मृ दु स्प र्शा य्या सु लि ता ल्ल यी
न्ते न्ता पं पि नि नां द्वा रि कृ णाः
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