दीना दीनमुखैः सदैव शिशुकैराकृष्टजीर्णाम्बरा
क्रोशद्भिः क्षुधितैर्निरन्नविधुरा दृश्या न चेद्गेहिनी ।
याच्ञाभङ्गभयेन गद्गदगलत्रुट्यद्विलीनाक्षरं
को देहीति वदेत्स्वदग्धजठरस्यार्थे मनस्वी पुमान् ॥

अन्वयः AI चेत् दीना, दीन-मुखैः, क्षुधितैः, क्रोशद्भिः शिशुकैः सदैव आकृष्ट-जीर्ण-अम्बरा, निरन्न-विधुरा गेहिनी दृश्या न (भवेत्), (तर्हि) कः मनस्वी पुमान् स्व-दग्ध-जठरस्य अर्थे याच्ञा-भङ्ग-भयेन गद्गद-गल-त्रुट्यत्-विलीन-अक्षरम् 'देहि' इति वदेत्?
Summary AI If a man did not have to see his wife—miserable, distressed by lack of food, her worn-out clothes constantly pulled by wretched, hungry, crying children—what high-minded man would, for the sake of his own cursed stomach, say "Give," with a choked throat and faltering words, fearing the humiliation of refusal?
सारांश AI यदि कोई स्वाभिमानी पुरुष अपनी दरिद्र पत्नी और भूख से तड़पते बच्चों की दयनीय दशा न देखे, तो वह केवल अपने पेट की आग बुझाने के लिए कभी किसी के सामने याचना नहीं करेगा।
पदच्छेदः AI
दीनादीन (१.१) miserable
दीन-मुखैःदीनमुख (३.३) with wretched faces
सदैवसदाएव always
शिशुकैःशिशुक (३.३) by children
आकृष्ट-जीर्ण-अम्बराआकृष्टजीर्णअम्बर (१.१) whose worn-out clothes are pulled
क्रोशद्भिःक्रोशत् (√क्रुश्+शतृ, ३.३) crying
क्षुधितैःक्षुधित (३.३) hungry
निरन्न-विधुरानिरन्नविधुर (१.१) distressed by lack of food
दृश्यादृश्य (√दृश्+यत्, १.१) to be seen
not
चेत्चेत् if
गेहिनीगेहिनी (१.१) the wife
याच्ञा-भङ्ग-भयेनयाच्ञाभङ्गभय (३.१) from fear of the humiliation of refusal
गद्गद-गल-त्रुट्यत्-विलीन-अक्षरम्गद्गदगल–त्रुट्यत् (√त्रुट्+शतृ)विलीनअक्षर with a choked throat and faltering, indistinct words
कःकिम् (१.१) what
देहिदेहि (√दा कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) Give
इतिइति thus
वदेत्वदेत् (√वद् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) would say
स्व-दग्ध-जठरस्यस्वदग्धजठर (६.१) of his own cursed stomach
अर्थेअर्थ (७.१) for the sake of
मनस्वीमनस्विन् (१.१) high-minded
पुमान्पुंस् (१.१) man
छन्दः शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८ १९
दी ना दी मु खैः दै शि शु कै रा कृ ष्ट जी र्णा म्ब रा
क्रो द्भिः क्षु धि तै र्नि न्न वि धु रा दृ श्या चे द्गे हि नी
या च्ञा ङ्ग ये द्ग त्रु ट्य द्वि ली ना क्ष रं
को दे ही ति दे त्स्व ग्ध स्या र्थे स्वी पु मान्
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